डिग्री देश बनाने की और काम मांग रहे लाश ठिकाने लगाने की। वो भी नहीं मिल रही। हर साल दो करोड़ नौकरी देने के फरेबी नारों के सामने इस देश को बेरोजगारी के कारखाने में बदल दिया गया है। जो देश का भाग्य बदलने की बात करते हैं उन्होंने नौजवानों के माथे पर बदकिस्मत लिख दिया है।